
उत्तराखंड में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार के प्रमुख माध्यम बनकर उभर रहे हैं। प्रदेश में 96,400 से अधिक एमएसएमई इकाइयों के जरिये 4.70 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलने का दावा किया गया है। इन उद्यमों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को अपने क्षेत्र में ही आजीविका के अवसर देने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। फल एवं खाद्य प्रसंस्करण, जड़ी-बूटी आधारित उत्पाद, मशरूम उत्पादन, जैविक खाद्यान्न, हथकरघा, हस्तशिल्प और पर्यटन जैसे क्षेत्र स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में होमस्टे और साहसिक पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को भी स्थानीय आय बढ़ाने के माध्यम के रूप में विकसित किया जा रहा है। वहीं, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में विनिर्माण और पैकेजिंग इकाइयां औद्योगिक गतिविधियों को गति दे रही हैं।
महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन
एमएसएमई क्षेत्र में महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकारी योजनाओं के तहत ऋण, अनुदान और अन्य प्रोत्साहनों के माध्यम से लोगों को अपना कारोबार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन के लिए ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसी पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका उद्देश्य उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना और स्थानीय उत्पादकों की आय बढ़ाने के अवसर तैयार करना है।
स्वरोजगार योजनाओं से उद्यमिता को बढ़ावा
राज्य में उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, एमएसएमई नीति, एक जिला-दो उत्पाद योजना और सिंगल विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था जैसी पहल संचालित की जा रही हैं। इनके माध्यम से नए उद्योगों की स्थापना, स्थानीय उत्पादों के विपणन और कारोबार से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन और सब्सिडी का भी प्रावधान है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, एमएसएमई इकाइयों का विस्तार और रोजगार के अवसरों का सृजन आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का उद्देश्य स्थानीय उद्यमों को प्रोत्साहित करने के साथ युवाओं को प्रदेश में ही रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। इससे स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, पलायन को कम करने के प्रयासों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में मदद मिल सकती है




