
रायपुर, छत्तीसगढ़: उचित मूल्य की दुकानों (राशन दुकान) में कालाबाजारी रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए पूर्ववर्ती सरकार की महत्वाकांक्षी योजना, जिसमें लाखों रुपये के सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, वह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। कैमरे लगने के 6 महीने के भीतर ही लाखों का सामान या तो चूहों ने कुतर दिया, या फिर वे चालू ही नहीं हो सके!
योजना बनी, पर मॉनिटरिंग कौन करेगा?
शासन की मंशा भले ही गरीबों के राशन की कालाबाजारी को रोकना थी, लेकिन योजना का क्रियान्वयन करने वालों ने इसे ही कालाबाजारी का नया जरिया बना दिया। पूरे राज्य का काम कथित तौर पर एक व्यक्ति के हाथ में सौंप दिया गया।
निगरानी शून्य: कैमरा लगाने के लिए न तो सरकार ने कोई अलग फंड की व्यवस्था की और न ही कोई मॉनिटरिंग (निगरानी) तंत्र बनाया।
मंत्री जी की मेहरबानी: पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत के आदेश तो हुए, लेकिन साथ ही भ्रष्टाचार की खुली छूट भी दे दी गई।
दबाव में संचालक: उचित मूल्य की दुकान के संचालक राजनैतिक दबाव में आकर इस घटिया योजना को चुपचाप झेलते रहे।
मुख्य सचिव के पास पहुँची गूंज, फिर फ़ाइल हुई दफन!
यह किसी से छिपा नहीं है कि खाद्य विभाग का भ्रष्टाचार से पुराना नाता रहा है। घटिया और गुणवत्ताहीन सीसीटीवी कैमरों की शिकायतें पूर्व सरकार के मुख्य सचिव तक पहुँचीं, लेकिन किसी कारणवश उस समय जाँच नहीं कराई गई।
सुशासन की सरकार में उम्मीद की किरण!
अब, जबकि राज्य में सुशासन की सरकार है और नए मुख्य सचिव ने पदभार ग्रहण किया है, यह कयास लगाया जा रहा है कि पूर्ववर्ती सरकार के इस ‘कैमरा घोटाले’ का पर्दाफाश होगा। क्या वर्तमान सरकार भ्रष्टाचार की इस पुरानी परंपरा को खत्म करेगी या इसे ही आगे बढ़ाएगी? यह एक बहुत बड़ा सवाल है, जिसका जवाब भविष्य के गर्त में छिपा है।
गरीबों के हक पर डाका डालने वाले इस भ्रष्टाचार का खुलासा होने से पहले ही, सीसीटीवी कैमरा योजना भ्रष्टाचार की दीमक का शिकार होकर ‘आत्मा’ को त्याग चुकी है!
यह वीडियो छत्तीसगढ़ की एक उचित मूल्य की राशन दुकान में लाखों की चोरी को दिखा रहा है, जो राज्य की राशन वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार और सुरक्षा की कमी को उजागर करता है:
Raipur News: उचित मूल्य की राशन दुकान में लाखों की चोरी। चोरी की घटना CCTV में कैद




